KVS ऑथोरिटी ने 2022 के ट्रांसफर के सम्बंध में विभिन्न केसों को लड़ने में कई करोड़ो रूपये फूंक दिए, ये करोड़ो रूपये टैक्स payer की गाढ़ी कमाई थी जो शिक्षा के विकास में लगती।
अधिकारियों के जेब से पैसे लगते तो ये अधिकारी एक पायदान भी आगे नही बढ़ते ......
2022 में जो ट्रांसफर हुए जो 0.01% भी नीतिगत नही थे,
पूरा केस ही तीन चार बिंदुओं के आधार पर अनीतिगत स्वयं सिद्ध है
1. जब तात्कालिक ट्रांसफर पालिसी 2021 में पैरा 6 था ही इसलिए कि कर्मचारियों की अमुख KVs में आवश्यकता या किसी जगह पर जरूरत होने पर प्रसाशनिक ट्रांसफर कैसे किया जाए।
जब प्रशासनिक ट्रांसफर के लिए पहले से क्लॉज़ था तो उसी क्लाज को abeyance रखकर ट्रांसफर करने का क्या औचित्य था??
2. जब नार्मल रूटीन ट्रांसफर 25-30 दिन में पूर्ण हो जाता है तो फिर मिनिस्टर के साथ 20/07/2022 को ट्रांसफर के सम्बंध में मीटिंग करके भी september 2022 यानी 52 दिन बाद अचानक इस प्रकार के ट्रांसफर का क्या औचित्य??
3.स्थापित पॉलिसी के कुछ पैरा (पालिसी की आत्मा पैरा6) को abeyance में रखकर , कुछ टीचर को टारगेट करने का क्या औचित्य था??
4. अगर कही टीचर की कमी थी भी, तो स्थापित पॉलिसी में 7g क्लाज था उसके अंतर्गत ट्रांसफर करने का प्रावधान था।आसानी से रेडिस्ट्रिब्यून और रेसनोलिसशन के लिए पैरा 6 के अंतर्गत ही टीचर उपलब्ध हो जाते।
5. साफ् परिलक्षित होता है कि कुछ ulterer motive के लिए ये सब किया गया।
6. कोरोना के समय सभी स्कूल में 90% स्टाफ मौजूद था,क्योकि 2019 में 7000 टीचर्स की भर्ती हुई थी, इसलिए kvs ऑथोरिटी द्वारा कोरोना का बहना लेकर इन अनीतिगत ट्रांसफर को जायज ठहराना औचित्यपूर्ण/तार्किक नही।
कोरोना के बाद तो 2021 में बल्क में नार्मल रूटीन ट्रांसफर किये थे।
7.उपरोक्त कारणों से यह 100% सिद्ध है कि kvs ऑथोरिटी ने जो 2022 के ट्रांसफर किये......इसके पीछे कोई
ulterer motive था।
Transfer done for vacant the seat not for fill the vacant post.
अगर खाली पोस्ट पर ट्रांसफर देने के लिए ही ट्रांसफर करना होता तो तत्कालीन स्थापित पॉलिसी हर प्रकार से सक्षम थी, लेकिन किसी पर्टिकुलर मनचाही सीट को स्थापित पॉलिसी के पैरा6 के होते हुए खाली करवाना सम्भव नही था, इसलिए कुछ पर्टिकुलर सीट vacant करने के लिए स्थापित पॉलिसी को डैमेज करना जरूरी था,और kvs ऑथोरिटी ने यही किया,.....
यही कारण है कि कर्मचारी माननीय न्यायालय की शरण मे HC तक गए और उनको न्याय भी मिला।
उम्मीद है माननीय सर्वोच्च न्यायालय SC में भी कर्मचारियों को न्याय मिलेगा।
सत्यमेव जयते🙏🙏
Post a Comment